Showing posts with label वफ़ा. Show all posts
Showing posts with label वफ़ा. Show all posts

Monday, January 24, 2011

वफ़ा की मूरत...!

थक के न हार ऐ मुसाफिर,
यूँ बैठ जाने से मंजिल न मिलेगी | 

टूटे हुए कांच के टुकड़ों में,
तुझे सूरत ठीक से न दिखेगी |

तू यूँ ही रोता रहा गर'
किसी की बेवफाई पर,
तो रुन्धाई आँखों से
वफ़ा की मूरत न दिखेगी | 

- दिनेश सरोज
छवि साभार : गूगल छवि

Monday, January 3, 2011

वफ़ा की उम्मीद

याद उनकी जिन्दा रखी है हमने अब भी,
उफ़नते सिने की ज्वाला से बचा कर,
तक़दीर ने छिनना चाहा उन्हें हमसे,
हर टूटती सांस से, बांधे रखा उन्हें हमने,
आरज़ू तो न हुई पूरी पाने की उसे,
फिर भी आस का सिलसिला टूटनें न दिया,
बेवफा भी तो न कह सकेंगे हम उन्हें,
हमसे ही, देर हुई बातें दिल की कहने में,
वफ़ा की उम्मीद तो तभी कर सकते थे हम,
जब जिंदगी में कभी उनके हो पाते...!

- दिनेश सरोज

छवि साभार : गूगल छवि