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Friday, September 2, 2016
Tuesday, November 2, 2010
तेरी याद!
हर वो पल लगे जैसे गुजरा बस अभी,
जब तू मेरी उंगली थामे फिराता मुझे,
मुझे अपने बाँहों में समेटे रहता,
घोड़ा बन मुझे घुमाता इधर-उधर,
फिर झट से अपने कंधे पर बिठा लेता,
तेरे छुवन का अहेसास अब भी -
महसूस होता है मुझे अक्सर |
अब भी रुलाता है जोरों से मुझे,
तेरा समंदर में डुबकी लगा -
डूबने का अभिनय करना,
तेरी मीठी आवाज कि गुंजन,
मुझे सम्मोहित अब भी करती है,
तेरे रटाये पहाड़ों को मैं,
दोहराता हूँ आज भी कभी-कभी |
अब भी सिहर-सा उठता है,
तेरी डांट से बदन मेरा,
तेरी पुकार पर नजर मेरी,
तुझे पास ही कहीं ढुंढनें लगती है,
तेरी याद रातों को अक्सर,
अब भी जगाये रखती है मुझे,
आता हूँ मिलने तुझसे अब भी,
तेरे घुमाये उन जगहों पर |
तेरी मुस्कान अब मैं अपने,
होंठो पर सजाये रखता हूँ ,
तेरी हँसी का पिटारा यहाँ-वहां,
अब मैं ही बिखेरता रहता हूँ,
ओढ़े रहता हूँ तेरा वो अक्कड़पन,
तेरे दिखाए सपनें देखता हूँ,
अब भी मैं अक्सर रातों में,
तुझी से सीखे अंदाज में,
मैं जीवन जीने का आनंद लेता हूँ |
जब तू मेरी उंगली थामे फिराता मुझे,
मुझे अपने बाँहों में समेटे रहता,
घोड़ा बन मुझे घुमाता इधर-उधर,
फिर झट से अपने कंधे पर बिठा लेता,
तेरे छुवन का अहेसास अब भी -
महसूस होता है मुझे अक्सर |
अब भी रुलाता है जोरों से मुझे,
तेरा समंदर में डुबकी लगा -
डूबने का अभिनय करना,
तेरी मीठी आवाज कि गुंजन,
मुझे सम्मोहित अब भी करती है,
तेरे रटाये पहाड़ों को मैं,
दोहराता हूँ आज भी कभी-कभी |
अब भी सिहर-सा उठता है,
तेरी डांट से बदन मेरा,
तेरी पुकार पर नजर मेरी,
तुझे पास ही कहीं ढुंढनें लगती है,
तेरी याद रातों को अक्सर,
अब भी जगाये रखती है मुझे,
आता हूँ मिलने तुझसे अब भी,
तेरे घुमाये उन जगहों पर |
तेरी मुस्कान अब मैं अपने,
होंठो पर सजाये रखता हूँ ,
तेरी हँसी का पिटारा यहाँ-वहां,
अब मैं ही बिखेरता रहता हूँ,
ओढ़े रहता हूँ तेरा वो अक्कड़पन,
तेरे दिखाए सपनें देखता हूँ,
अब भी मैं अक्सर रातों में,
तुझी से सीखे अंदाज में,
मैं जीवन जीने का आनंद लेता हूँ |
- तेरा- दिनेश
छवि साभार: गूगल छवियां
Sunday, February 15, 2009
दिल में है आज भी तेरी याद !
हैं यादें उसकी जहन में मेरे -
आज भी बसी कहीं|
है पकड़ उसके बाँहों की -
आज भी मेरे आगोश में|
है पड़ती सुनाई मुझे -
अब भी कहीं,
उसकी मीठी आवाज|
पर नजर नहीं आती कहीं -
उसकी वो हसीं मुस्कान|
उसकी शरारत को मैं -
तरसता सा हूँ अक्सर|
ख्वाबो में मेरे हर रात -
आते हैं मंजर,
जो गुजरे थे उसके साथ|
ए भाई जान ले -
इस दिल में मेरे है बरकरार,
आज भी तेरी याद !
@ Dins'
आज भी बसी कहीं|
है पकड़ उसके बाँहों की -
आज भी मेरे आगोश में|
है पड़ती सुनाई मुझे -
अब भी कहीं,
उसकी मीठी आवाज|
पर नजर नहीं आती कहीं -
उसकी वो हसीं मुस्कान|
उसकी शरारत को मैं -
तरसता सा हूँ अक्सर|
ख्वाबो में मेरे हर रात -
आते हैं मंजर,
जो गुजरे थे उसके साथ|
ए भाई जान ले -
इस दिल में मेरे है बरकरार,
आज भी तेरी याद !
@ Dins'
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