Sunday, August 7, 2011

सिमटी रहे तू मुझमे



यूँ ही रहना इन बाँहों में,
न जाना दूरकहीं, मेरी 
सोहबत की छाँव से,
न होना दूर कभी |

कि बसती है तू ही 
इन निगाहों में, मेरी  
धड़कन भी है तू ही, 
कोई और नहीं |

मीठा सा अहसास तेरे 
स्पर्श का ओ सनम,
कभी न छूटे साथ तेरा,
सिमटी रहे तू मुझमे यूँही |


- दिनेश सरोज



छवि साभार: Salina Trevino

9 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. बहुत ही खुबसूरत प्यारी रचना....

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  3. SHANDAR..pehli baar aapke blog pe aana hua accha laga..apne blog pe amantran ke satu..

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  4. आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी एवं चर्चा मंच का तहे दिल से कोटि कोटि धन्यवाद की आपने मेरी प्रस्तुति को चर्चा मंच पर प्रस्तुत करने का सम्मान दिया...

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  5. आप सभी का तहे दिल-से धन्यवाद...!

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  6. waah...
    wakai wo simati hai...
    bahut hi pyaari rachna...

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